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राज-समाज और जन की आवाज :जनोक्ति

2009 October 11

यह लेखनी कैसी कि जिसकी बिक गयी है आज स्याही !

यह कलम कैसी कि जो देती दलालों की गवाही !

पद-पैसों का लोभ छोड़ो , कर्तव्यों से गाँठ जोड़ो ,

पत्रकारों, तुम उठो , देश जगाता है तुम्हें !

तूफानों को आज कह दो , खून देकर सत्य लिख दो ,

पत्रकारों , तुम उठो , देश बुलाता है तुम्हें !

” जयराम विप्लव “

आज एक दुनिया देखी हमने, जहां अभिव्यक्ति विकृति की संस्कृति में ढल रही है .हिंदी समाज की विडंबना हीं कहिये , सामाजिक सरोकारों पर मूत्र त्याग कर व्यक्तिगत स्वार्थों में लिप्त हो लेखन कर्म को वेश्यावृत्ति से भी बदतर बना दिया गया है .अंतरजाल में शीघ्रता से फ़ैल रहे हिंदी पाठक कुंठित दिखते हैं . मौजूदा समय में धार्मिक कुप्रचार ,निजी दोषारोपण,अमर्यादित भाषा ,तथ्य और तर्क विहीन लेखन यत्र तत्र बिखरे पड़े हैं .

जब विचारों को किसी वाद या विचारधारा का प्रश्रय लेकर ही समाज में स्वीकृति मिलने का प्रचलन बन जाए तब व्यक्तित्व का निर्माण संभव नही. आज यही कारण है कि भारत या तमाम विश्व में पिछले ५० वर्षो में कोई अनुकरणीय और प्रभावी हस्ताक्षर का उद्भव नही हुआ. वाद के तमगे में जकड़ी मानसिकता अपना स्वतंत्र विकास नही कर सकती और न ही सर्वसमाज का हित सोच सकती है.

मानवीय प्रकृति में मनुष्य की संवेदना तभी जागृत होती है जब पीड़ा का अहसास प्रत्यक्ष रूप से हो.जीभ को दाँतों के होने का अहसास तभी बेहतर होता है ,जब दातो में दर्द हो. शायद यही वजह रही कि औपनिवेशिक समाज ने बड़े विचारको और क्रांति को जन्म दिया. आज के नियति और नीति निर्धारक इस बात को बखूबी समझते है . अब किसी भी पीड़ा का भान समाज को नही होने दिया जाता ताकि क्रांति न उपजे. क्रांति के बीज को परखने और दिग्भ्रमित करने के उद्देश्य से सता प्रायोजित धरना प्रदर्शन का छद्म खेल द्वारा हमारे आक्रोश को खोखले नारों की गूंज में दबा देने की साजिश कारगर साबित हुई है. कई जंतर मंतर जैसे कई सेफ्टी-वाल्व को स्थापित कर बुद्धिजीवी वर्ग जो क्रांति के बीज समाज में बोया करते थे, उनको बाँझ बना दिया गया है.इतिहास साक्षी है कि कलम और क्रांति में चोली दामन का साथ है. अब कलम को बाज़ार का सारथि बना दिया गया. ऐसे में किसी क्रांति की भूमिका कौन लिखेगा? तथाकथित कलम के वाहक बाज़ार की महफिलों में राते रंगीन कर रहे है.बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नही हो सकता.

तो अब जबकि बाज़ार के चंगुल से मुक्त अभिव्यक्ति का मन्च ब्लागिंग के रूप में सामानांतर विकल्प बन कर उभरा है तो हमारी जिम्मेदारी है कि छोटी लकीरों के बरक्स कई बड़ी रेखाए खिची जाएं. बाज़ारमुक्त और वादमुक्त हो समाजहित से राष्ट्रहित की ओर प्रवाहमान लेखन समय की मांग है. “जनोक्ति” परिवार ओज और धार से बनी हर एक लेखनी को आमंत्रित करता है । हमारे परिवार में शामिल होने के लिये चट्का लगायें ।

आइये आपको मिलवाते हैं जनोक्ति परिवार के सम्पादकीय समूह के महत्वपूर्ण लोगों से : –

संपादक

जयराम “विप्लव”

मूलतः मुंगेर (बिहार) के रहनेवाले हैं. नेतृत्व की असाधारण क्षमता और विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की अकूत शक्ति आपके व्यक्तित्व में समाहित है . अपना आधार खोती जा रही छात्र राजनीति को पुनर्स्थापित करने की लड़ाई के सिपहसालारों में से एक “विप्लव” जी अनेक सामाजिक संगठनो के दायित्वधारी कार्यकर्त्ता हैं.अपनी प्रारंभिक शिक्षा भागलपुर से पूरी करने के बाद आपने दिल्ली का रुख किया. वर्त्तमान में जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में स्नातक की उपाधि ग्रहण कर रहे हैं.”जनोक्ति ” ब्लाग से अंतरजाल पर दस्तक देने के बाद आपने जनोक्ति डाट कॉम को स्थापित किया, जिसे आज वैचारिक जगत में अपने गंभीर और प्रभावी पाठ्य सामग्री के लिए जाना जाता है .पथभ्रमित पत्रकारिता को प्रोफेशन से मिशन की ओर प्रवाहित करने के लिए निरंतर संघर्षरत हैं. आपसे संपर्क करने का पता है :

ई-मेल – editor@janokti.com , janokti@gmail.com

संपर्क सूत्र – +91-9718108845,

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कार्यकारी संपादक

नरेन्द्र निर्मल

मूलतः बोकारो (झारखण्ड) के निवासी है और दिल्ली में पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं. गत पांच वर्षो से विभिन्न सामाजिक और काव्य मंचो पर उपस्थित रहे. निर्मल जी कवि और समाजसेवक के रूप में भी जाने जाते हैं. “वाई एम् सी ए ” से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर करने के बाद ‘ आवाज ‘ निर्माण संवाद ‘ जिन्दा लोग’ आदि पत्रिकाओं से भी जुड़े रहे हैं .

आपसे संपर्क करने का पता है.

ई-मेल – nirmalkumar2k5@gmail.com

संपर्क सूत्र – +91-9015130906, 9868033851

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उप-संपादक

दीपाली पाण्डेय

मूलतः दिल्ली की रहने वाली हैं . दिल्ली विश्वविद्यालय से आपकी पत्रकारिता में स्नातक की पढाई जारी है . आप अध्ययन के साथ अध्यापन और लेखन का कार्य करती हैं . फिलवक्त जनोक्ति परिवार से जुड़कर अपने पत्रकारीय कर्म में भिड़ी हुई हैं . आपसे संपर्क करने का पता है :

ई-मेल – sub-editor@janokti.com , deepalipandey006@gmail.com

संपर्क सूत्र – +91-9990002147

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आत्मानंद

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तकनीकी संपादक

अभिषेक कुमार सिंह

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फीचर संपादक

पुष्पेन्द्र आल्बे

बचपन से लेखक बनने की छह रखने वाले पुष्पेन्द्र जी ने सृजनात्मक चुनौतीपूर्ण और रोमांच की संभावना को देखते हुए करियर के रूप में प्रिंट मीडिया को चुना . एक खेल संपादक के रूप में प्रिंट मीडिया में 8 साल पहले काम शुरू किया और धीरे-धीरे खुद को एक सब राउंडर के रूप में स्थापित किया .वर्तमान में एक राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, “हेलो हिन्दुस्तान” में प्रतिलिपि संपादक हैं खेल-जगत से लेकर राजनीतिक गलियारों की हलचलों पर अपनी पैनी निगाह रखते हैं .

पुष्पेन्द्र जी के काम का मन्त्र है “you cannot reach out to people by saying things the same way you have been saying them. You have to say them differently.” .

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अनिकेत प्रियदर्शी

मूलतः बिहार के रहने वाले हैं . जनसंचार एवं पत्रकारिता(MJMC) में स्नातकोत्तर करने के इन्होंने मीडिया का रुख किया . विविध विषयों पर अपने विचारों को शब्दों में ढालने की बेहतरीन शैली रखने वाले अनिकेत जी स्वतंत्र लेखन करते हैं और जनोक्ति वेब मीडिया के सम्पादकीय समूह में शामिल हैं . अनिकेत जी का मानना है कि मुझे कर्म करने पर अधिकार है , फल में नहीं | पर एक बात मैं मानता हूँ की विश्वास से आश्चर्यजनक प्रोत्साहन मिलता है |

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संरक्षक

डा० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

डा० मधु लोमेश

श्री संजय द्विवेदी

श्री आनंद पाठक

मिस पूजा सिंह आदर्श

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जनोक्ति वेब मीडिया

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सम्पादकीय और पत्राचार

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